गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

सुप्रभात ़


वक्त के इस पहिये ने देखो ला दिया है फिर से शुक्रवार....! मुझको ऐतबार है कि आज मिलेगे

मुझे भुले- बिछड़े यार..! अरे..! अरे..! रुको-रुको भाई सतवीर...... तुम्हें सत् श्री आकाल.......!

रुको...रुको... भाई कलाम... तुम्हें भी सलाम..  ओफ्हो ....डेविड ब्रदर... गुड मार्निँग तो कर लो

यार..! अरे भाई रमन तुम मिल गये ....तुम्हें भी नमन...! अभी और मिलेगे मित्र गण उन्हे कहूँगा

सु-प्रभात...! हम सभी खुश रहे खिलता रहे अपना चमन..! हे.. भारत माता तुम्हे शत् शत्

नमन... वन्दे मातरम..! —
                 ~~~~~~ मनीष गौतम "मनु"
आनें वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो.....!!

प्यार..... ! इस युग का दुर्भाग्य.....?


प्यार - प्यार - प्यार  आखिर प्यार है क्या.?

जी  |  प्यार किसी रिश्ते जैसे -
माता- पिता/भाई-बहन /पति- पत्नी/ सभी प्रकार के नातेदार/रिश्तेदार /और इस कलयुग का सबसे प्रमुख रिश्ता "प्रेमी  जोड़ों" के बिच  "प्रेम |"

इन सभी रिश्तों के लिए  | दिल/दिमाग में पैदा होने वाली ,"चाहत" की वह कशिश या अधिरता या व्याकुलता या खलबली मचा देनें वाली एक "संवेदना या भावना हैं |" जिसे हम प्यार कहतें है 

"संवेदना या भावना" को रिश्तों के बिच में रिश्तों के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार  से  हम व्यक्त करतें हैं ..

जैसे -चरण स्पर्श कर  /सर झुकाकर /सम्मान पूर्वक बोल कर  /हँस कर  / मंदममद मुस्कुराकर / स्पर्श कर/सिनें से लगाकर / गले से लगा कर / बाँहों में भर कर /  लिपटकर /  लिपटाकर /आँखों में आँखे डालकर / सहला कर / पुचकार कर/ चूमकर / सजसँवरकर /  व्यवहार कर / नाच कर / गा कर / ललचाकर / ईतराकर. /मटककर /खुशी और गम के आँसू टपका कर/राम-रामई ले  कर / नमन  कर/ शुक्रिया अदा कर / मिठी-मिठी बातें कर  आदि आदि ||

इन सभी प्यार के प्रकारों में --
चूमना/ पुचकारना /सहलाना/ मिठी- मिठी बातें करना / लिपटना/ लिपटाना/ ईतराना/मटकना/
सजना/सँवरना / बाँहों में भरना /बाँहों में समा जाना/ गले लगना/ गले लगाना/आंहें भरना आदि आदि !!  ऐसा प्यार.. आज  प्रेमि- जोड़ों  के बिच  थिरकता है मचलता है  !

मगर अफसोस .... बाकी रिश्तों के बिच आज दिखावे /और  बनावटी रूपि प्यार ने रिश्तों नातों के  बिच दरार और दुरीयाँ  बड़ा दी हैं ! जो इस कलयुग का एक दुर्भाग्य है.क्या मैने सच कहा .?
 आलेख  ~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

शुभ*°* संध्या मित्रों....

आनें वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो...!!

जी प्यार है... ..


जी प्यार  किसी रिश्ते जैसे -
माता- पिता ,भाई-बहन, पति- पत्नी, सभी प्रकार के  नातेदार- रिश्तेदार और अंत में सबसे प्रमुख " प्रेमी- प्रेमिका"   |

इन सभी रिश्तों   के प्रति  ---
दिल-दिमाग में  "चाहत"  की खलबली मचा देनें वाली एक "भावना या  संवेदना हैं | " 

 जिसे हम प्यार कहतें हैं  | जिसे हम रिश्तों के अनुरूप अलग-अलग तरिकों से  व्यक्त करतें है  |

जैसे -पैर छू कर /सर झुकाकर /सम्मान पूर्वक बोल कर /हँस कर /मुस्कुराकर/ छू कर/सिनें से लगाकर/ बाँहों में भर कर /आँखों में आँखे डालकर/ सहला कर / पुचकार कर/ चूमकर/ लिपटकर/  सज-सँवरकर/ व्यवहार कर / नाच कर /  गा कर / लचककर-झटककर-मटककर /खुशी और गम के आँशु बहाकर/राम-राम,नमन ,प्रणाम या  नमस्कार कह कर/ शुक्रिया अदा कर/मिठी-मिठी बातें कर/ जोर जोर से या मंदमंद मुस्कुराकर   आदि आदि ||   तरिकों से  हम अपनी संवेदना और भावना  व्यक्त करते हैं | जिसे हम प्यार कहते हैं  |

इन सभी प्यार के प्रकारों में --चूमना/ पुचकारना /सहलाना/ मिठी- मिठी बातें करना / लचकना- झटकना - मटकना/ सजना -सँवरना / बाँहों में बाँहें डालना / लिपटना  || ...

प्रेमि- प्रेमिका के बिच ज्यादा दिखाई देता है ||

I am Right Brother.?

…                ~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

बुधवार, 29 अप्रैल 2015

आस और प्यास ____\\__माँ

ओ मेरी आँखो का तारा है.!
मेरा राज - दुलारा है.!!

वो दुर रहे तो मेरी हँसी मुरझा जाती.!
वो पास रहे तो  मैं  प्यासी रह जाती.!!

उसके पास मेरे लिए वक्त नहीं .!
ये सोच कर दिल उदास है..!!

पर वो मेरे बुढ़ापे की 'आश' है.!
इसीलिए वो मेरा 'खास' है...!!

~~~~~ >मनीष गौतम "मनु"

सुप्रभात  *मितों~

आनें वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो...!!!

जवाब

छाया चित्र पर मेरा .....
*****मेरा जवाब***** 

ओ मेरी आँखो का तारा है.!
मेरा राज - दुलारा है.!!

वो दुर रहे तो मेरी हँसी मुरझा जाती.!
वो पास रहे तो मैँ प्यासी रह जाती.!!

उसके पास मेरे लिए वक्त नहीँ..!
ये सोच कर दिल उदास है..!!

पर वो मेरे बुढ़ापे की 'आश' है.!
इसीलिए वो मेरा 'खास' है...!!

~~~~~ >मनीष गौतम "मनु"

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

किसान

किसान के लिए जीना-मरना एक समान , उगाई दाल सब उसी की खाते है और मौका देख सब के सब उसी के सिनें में दाल मूंगने लगते हैं  ?

मुझे लगता है -किसान की जिन्दगी से जब ऊपर वाला ही खेलता है ? तो निचे वाले कब बकसनें वालें ? तैयार रहतें हैं  !

"जख्मों पर कॉटों की नोंक से मलहम लगानें  !"

किसान भी तो पृथ्वी का सबसे बड़ा " जुआरी" है उसे तो दॉव खेलना ही पड़ता है | चौपड़ लगाना ही पड़ता है | और हार जीत का सामना भी खुद ही करना पड़ता है  | क्योंकि वो -

"खिलाड़ी". नहीं  " जुआरी" है. |"

( जुआरी- प्रकृती के साथ अपनी मेहनत की फसल  दॉव लगानें वाला अर्थात प्रकृती नें साथ दिया तो किसान " आबाद" प्राकृतिक विपदा आयी तो "बर्बाद. !" )

किसान संबंधित जितनें मसले हुऐ हैं | हो रहें हैं | आगे भी होंगे | सभी मसले राजनैतिक फायदे के लिए हैं | अगर कुछ मिला भी है  | तो वो है -

"मौत" या फिर "लॉलीपॉप"

या इससे ज्यादा कुछ मिला भी तो कह सकते हैं |

"आईसक्रिम रूपी राहत राशि " 

आनंद चंद मिनट का, ज्यादा देर साथ दे सकती  न पेट भर सकती |

किसान की पूर्ती कोई कर सकता ही नहीं , गर करे भी तो कहां से ? किसान के बिना कुछ हो सकता भी नहीं .! अत: किसान अपनी  "आन -  बान - शान "  बनानें का खुद ही मालिक है   |

फंड़ा की __\\__ "बिना मरे सरग नहीं मिलता"

____\\____\\___\ _ __/\_ जय किसान _/\_

.आलेख ~
.                        ~~~~> मनीष गौतम   "मनु"

जै श्री कृष्णा....

हे कृष्णा जै कृष्णा हे कृष्णा जै कृष्णा हे कृष्णा
जय जय श्री कृष्णा मन की मिटा दे सारी तृष्णा

सुप्रभात * मित्रों
आने वाला " पल" और " कल" मंगलमय हो..

हे शिव शंकर शंभू...

हे. ! भोले भण्डारी हे..! भाल चन्द्रधारी
डमरू की ताल  पर नृत्य   करके भारी

दिखा ही  दिया तूने  अपनी  चमत्कारी
हे ...!  क्रोधेश्वर   हे ..   !  निलकंठेश्वर

दुनियाँ  डरी  सहमी  है     हे   रूद्रधारी
अब न दिखाओ कोई अपनी चमत्कारी

हे मेरे भोले शंकर हे मेरे भोले भण्डारी
दीजिए हमको अभयदान हे  क्षमाकारी

हे .! भोले भण्डारी हे .!  भाल  चन्द्रधारी
ऊँ नम: शिवाय ~*°*~ ऊँ  नम: शिवाय

उमापति महादेव की जै *  हर हर महादेव
हर भोला...!   हर हर. ....!!   महादेव....!!!

़      ~~~~~~> मनीष गौतम  "मनु"

शुभ*संध्या मित्रों

आनें वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो
_/\_ राम राम  जी _/\_

ये तस्विर बहुत कुछ कहती है ..


ये तस्विर मौंन हो कर भी  बहुत कुछ कहती है
चलती न फरती फिर भी संग हमारे ही रहती है

देती हमें  फल /फूल /छाँव/ प्राण /वायु  /मगर
बदले  हमारे पत्थर से ही चोटील होते रहती है

सर्ववस्व निछावर कर दिया सारा जीवन अपना 
बेईज्जत ही हुई /बेकल ही हुई /बेगाना ही हुई 

लुटती रही /मिटती  रही /कभी  उफ्फ न  कही
बाहें पसारे मौन हो कर सब दर्दों को ये सहती है

ये तस्विर मौंन होकर भी बहुत कुछ कहती  है 
चलती न फिरती फिर भी संग हमारे ही रहती है

ये तस्विर मौंन होकर भी बहुत कुछ कहती  है

मगर अफ्शोस मानव ने इसका दोहन ही किया
सँवरे चमन को अब तिल-तिल उजाड़ ही दिया 

जान कर अंजान बनाअपनें दर्द का प्रमाण बना
पर अब भी बहुत कुछ है  जीवन सँवरेगा अपना

स्वार्थपन से परे हो जाओ सब  चैतन्य हो जाओ
़़़़़़़़देखो / समझो/ सुनों / ़़़़़़
ये तस्विर मौंन हो कर भी बहुत कुछ कहती है ..!!

                  .~~~~> मनीष गौतम " मनु"

शुभ *संध्या मित्रों..

आनें वाला  "पल"  और  "कल"  मंगलमय हो.....!!

रविवार, 26 अप्रैल 2015

.         *°*उमापति महादेव की जै*°*
.            _/\_हर हर महादेव  _/\_

हे कृपा निधान  हे दया निधान किजै सब की रक्षा हो जन- जन का कल्याण.जै जै जै शंकर शंभू~

सुप्रभात मित्रों
आनें वाला "पल" और  "कल" मंगलमय हो....

आत्मिक आभार


पहला नमन उस रब को जिसने मुझे बनाया है...!

दूजा नमन माता-पिता को जिन्होने मुझे पैदा किया और ये जहाँ दिखलाया है..!

तीसरा नमन गुरु को जिसने मुझे ज्ञान दे कर मेरा मान बढ़ाया है..!

और चौथा नमन उन साथीयो को जो फेसबुक मित्र बनाकर मुझसे आत्मिक लगाव लगाया है..!!
                  
़                       ~~~~> मनीष गौतम "मनु"
*आत्मिकता के साथ सुप्रभात मित्रो*

आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो.....

संवेदना.

दु:खद संध्या मित्रों..|
भारत-नेपाल में प्रकृतिक विपदा नें जन-धन
की हानि के साथ एक डर भी पैदा किया है |

ईश्वर से प्रर्थना की -उन सभी डरी/ सहमी /असहाय /जनता  की- रक्षा करे ! उन्हें इस
दु:खद  घड़ी  से  शिघ्र उबारे ...!
हे....!  ईश्वर... !!
आनें वाला  "पल" और "कल" मंगलमय हो...
़                                     !! ऊँ शान्ति ऊँ !!

मैं नहीं .. लोग ये कहते..! बाजार बनकर बैठी है ...!!!


़         दोष न दो निर्दोश है ये तो
़  समाज के लिए जींती हैं और मरतीं है

़          नारी एक और रिश्ते अनेंक
रिश्तों के ताने-बानें में उलझती कभी सुलझती हैं

इसे लाचार कहें या इसकी आवश्कता .!
़               या /फिर/क्या....
मानव  हवस  की प्यास बुझानें बैठीं  है.??

अंश तो इनमें नारायणी का भी होता .!
़               या/फिर/क्या....
अपने धर्म को बद्नाम करने बैठी हैं .??

मानव समाज का है ये इक कालिख धंधा !
़               या/ फिर/क्या....
अपनें बच्चे के पोषण-आहार के लिए बैठी हैं.??

नारी गले में होती एक काले सूत की माला !
़               या/फिर/क्या....
माला नहीं तो अनाधिकार रूप से बैठीं हैं.??

नारी धूरी और रिश्तों की सेतु कहलाती !
़               या/फिर/क्या....
अपनें रिश्तों का  तिरस्कार करनें बैठी है.??

समाज ने अच्छा नाम दिया न काम दिया !
़               या/ फिर/क्या....
यहाँ बहिस्कृत और तिरस्कृत हो कर बैठी है.??

नारी अनुपम /रूप अनेंकम/ नाम अनेंकम ...
  
.   !!सामाज ने जो "बाजारु" नाम दिया!!
़                         //और//
.   !!बिकाऊ संबंध  बनानें  बाध्य किया!!
शायद उस नाम /ऱिश्तों को ही निभानें बैठीं हैं .?

ं   !!*!!नारी का हम  सब सम्मान करें !!*!!
!!*!!अच्छे  रिश्ते के अनुरूप व्यवहार करें !!*!!

़                      ~~~~> मनीष गौतम "मनु"

शनिवार, 25 अप्रैल 2015

संवेदना


कल की हृदय-विदारक घटना से दु:खी परिवारों के प्रति संवेदना |  हे ईश्वर हम मानव को क्षमा कीजिए हम पर दया  कीजिए .!!

मित्रों दु:ख की घड़ी आन पड़ी ___\\____\\__
____\\____\\___ चलो जुड़ जायें कड़ी से कड़ी
सुप्रभात मित्रों ,
आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हों....!!

आज-भूकंप की फटकार...??


भूकंप के झटके..!
जाँ गले में  आ अटके .!!
प्रकृति से होंगी खिलवाड़.!
यूँ ही पड़ते रहेंगी फटकार.!!
गर प्रकृति का होता रहेंगा शोषण.!
भूकंप का भी होंगा  इक दिन प्रमोशन.!!
जब पानी सिर के ऊपर से ही चलाजायेगा .!
फिर  सोच लीजिए जलजला ही आ जायेगा.!!
प्रकृति का करें हम  सभी हर दम मान सम्मान .!
तब  ही  पृथ्वी पर  होंगा जन जन  का कल्याण!!!

आज दु:ख की घड़ी आन पड़ी__\\_____\\___

___\\_____\\__ चलो मिल जायें कड़ी से कड़ी
                      
.                 ~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

शुभ*संध्या मित्रों

आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो.....!!!

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015

"बाला"

सुन्दर सुजल सरल नयन,
बचपन की अटखेलियां
मन को करे  मगन
बढ़ता बचपन जवानी को
बाला से बन जाती नारीयां
नारायणी रुपेण नारी
माँ-बहन-पत्नी  बनती नारीयां
रिश्तों की "सेतु" और धूरी
अब भ्रूण हत्या पर वारीयां
सृष्ठी बचेगी अब कब तक
जब होगीं ही नहीं नारीयां.....!!!!

भ्रूण हत्या बंद करो \\!//नारी का सम्मान करो
.               ~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

सुप्रभात मित्रों
आनें वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो.....!!!

सोमवार, 20 अप्रैल 2015

याद~ हमारे पूर्वज

वो रुठे तो यादो में आते..
न  ऱुठे तो दिल में समा जाते..!!

ये चाहत की कशिश में बड़ा दम है..
दिवानगी  में कभी खुशी-कभी गम है .!!

हमारी चाहत क्षैतिज के आर-पार है..
तू यादों  में भी रहे तो कोई गम नहीं..!!

मुझे जीने के लिए तेरी याद .!
किसी से कम नहीं  नहीं...!!!!
.            ~~~~~~>मनीष गौतम "मनु"

सुप्रभात *मित्रों
आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो....

शोभा


शोभा की 'सभा' है या,
सभा मे है 'शोभा'....!!

सुरज की आभा में शोभा ,
सुबह की पुरवाई में शोभा..!!

बगियन की हर कलीयन में शोभा,
झर-झर झरते  झरने में शोभा ....!!

प्रकृति के हर रंग मे है शोभा.,
शोभा से दृष्टीगत हो जाता जब मन ,..!!

बड़ जाती  है मन की शोभा ,
शोभा बिना सब लगे अ-शोभा ....!!

.                      ~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

मित्रो हो गई है सुबह,

आ गई है चाय..! आप सभी को ,

Gööd Mörning, निंदिया को by by..!

रविवार, 19 अप्रैल 2015

हमारी आवश्यकता~


समाज में हमारी आवश्यकता-
"सब्जी में नमक " की तरह होनी चाहीऐ   |

जैसे - "सब्जी" में  "नमक" हो कर भी, किसी
को  दिखाई नहीं देता | केवल महसूस  होता  है  |

यदि  "सब्जी  में नमक"  न  हो  तो ,
सब उसकी   याद करते है...!!

.                     ~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

शुभ-संध्या मित्रों _
आनें वाला "पल" और "कल"  मंगलमय हो..!!

शुभ रात्री

इतनी जल्दी  कहाँ  नींद  मुझे आती  है ़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़
मै जागता हूँ और रात सो जाती है ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं
सुबह होते ही  मैं फिर बिखरने लगता हूँ    ंं ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं
न दिन को चैन  न रात सो सकता हूँ  !
ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं
और  आपकी  चाहत भी  ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं
  बार -बार ये कहते जाती है ंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंं
♥  रात बाकी है अभी♥  बात बाकी है.  ♥
♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
But**You**Good-Nigit **♥('-,_, ♥
♥-$!*!w!*!e!*!e!*!t ♥d*r*e*a*m*s
('-,♥-,_,-♥-, ♥('-,_,-♥-,_,-♥-,.¢
                ~~~~~~~> मनीष गौतम " मनु"

शनिवार, 18 अप्रैल 2015

खूबसूरत मनभावन छवि £


लग रहा है ___ *°* एक सुन्दर सा मुखड़ा*°*.

नाम है ..........................................

सादा है जीवन, उच्च विचार..! आँखों में तेज ,   

दिल में है प्यार.! चाँदनीयों की  भीड़ मे,ये चाँद

सदा चमकते रहे..! प्रभु से, की है हमने गुहार..!

हमारा-तुम्हारा सदा, बना रहे प्यार -प्यार -प्यार

और  प्यार ....!!  (एक सुन्दर छवि)

____\\_______\\_____ मनीष गौतम "मनु"_

ढपोल शंख ~ इक फरीयाद है भाई....!!

ढपोलशंख ....."शंख" हो गये... हम.!
लाउडिस्पीकर का "शोर" हो गये....????

हमनें की है  एम . ए./बी. ए.....!
फिर भी बर्तन धोने मजबूर हो गये...?

और वो अनपढ़/गँवार/अँगुठा/ छाप है ..!
लेकिन  फिर भी कुर्सी पर "सिरमौर" हो गये..?

शेरो ने ललकारा लेकिन...........!
कबाब/दारू /होंट/ नोंट / से वोट हो गये..?

पश्चिम से लहराती/बलखाती आई  इक "हया".
सारे लैला-मजनु उस ओर हो गये.......?

हमने पुछा ये क्या भाई..? तो वो बोले ...!
हिन्द की "ओड़नी" से हम बोर हो गये...?

अब कैसे-कैसे दिन देखने मिल रहें हैं...!
वो हमारे घर आये और गदर करके चले गये..?

अब देश की रक्षा के लिए शायद.........
कोई  "सरफरोशी"  नहीं .........?

देखो..!  देखो...!!  देखो.......!!!
वो मेरी बातें सुन...!!!!!

टाँग पसार के......!!    चादर तान के .......!!
और सो गये ............?

ढपोलशंख ...."शंख" हो गये...हम ..!
लाउडिस्पीकर का "शोर" हो गये.....???
     
~~~~~~>> मनीष कुमार गौतम "मनु"

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

चुटकूला

बच्चे टीचर से- मेडम जी, हिन्दी क़ी टीचर हिन्दी मेँ, अँग्रेजी के टीचर अँग्रेजी में  ! और संस्कृत की टीचर संस्कृत  में  पढ़ातीं हैं  ......!!

आप गणित की टीचर हैं ! गणित भाषा में क्यों
नहीँ पढ़ातीं ...?

टीचर- हाँ  हाँ  हाँ  अब यदि तुमने ज्यादा 19-20 करी ना ! तो मैं तुम्हें कक्षा से नौ दोग्यारह दूँगी 
समझे . ..!!!
             
               ~~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

((((((((((शुभ संध्या मित्रों )))))))))
आनें वाला "पल"और "कल" मंगलमय हो.....

गुरुवार, 16 अप्रैल 2015

आयें थोड़ा सा मुस्कुराऐं.. ...

लों..? हराम  जादा .कमिना .. कुत्ता  फिर आ गया..??

अरी......सुन.......ढब्बू की महतारी..!!

मेरी कविता सुन कर तुम्हें कैसा लगा..?

नेता जी ने अपनी श्रीमती से पुछा.!
श्रीमती जी ने उत्तर दिया-

जी, चार बार आप आये हो कविता
की पंक्तियो में ! एक बार मैं .......!!

------->> मनीष कुमार गौतम "मनु"

सुप्रभात मित्रों
आने वाला पल और कल मंगलमय हो...

बुधवार, 15 अप्रैल 2015

fb पर पुछा जाने वाले सवाल पर मेरा जवाब

आज-कल शादी की जल्दी दोनों को  नहीं  .....?

क्योंकि- लड़के  आजाद पंछी बन पेड़ की हर डाल बदलनें में समय बिताते रहतें  है .....?  और

कुछ लड़कीयाँ अपने  "कॉलेज रूपी" जीवन  सफर  में  आपना रंग-रुप और ज्ञान-शान की  "धाक"  जमानें  के चक्कर   में  चक्कर पर  चक्कर लगातीं रहतीं  हैं..?

वैसे  भी आज-कल  के जमाने में  शादी जैसी शादीयाँ होती कहाँ  है .......?    अब  तो शादी से पहले शादीयाँ हो जाती है ................????

भाई .. ये तो मजाक था  !  पर सच कहें शादी की जल्दी  हमेंशा लड़की  के माँ-बाप को  ही होती  है..|

पृथ्वी पर आदिकाल से  नर और नारी  का अस्थित्व  विवाह के पवित्र बंधन से  ही बचा है  |  हमें  इसे मलिन  होने से  बचाना  है........||

.                   ~~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

शुभसंध्या मित्रों आने वाला पल और कल मंगलमय हो .

मंगलवार, 14 अप्रैल 2015

ये ऩजर का नजराना...

                   कभी इतराना  // कभी  इठलाना           कभी मचलना//कभी मचलाना                                  

                      कभी हँसना // कभी हँसाना                कभी रोना// कभी रुलाना            

कभी नजर से गिराना / /कभी नजर से उठाना                 कभी नजर से भगाना / /कभी नजर से बुलाना 

           कभी निशाना लगाना/ /कभी निशाना बनाना                   नजरों का ये नजराना बड़ा अच्छा लगता है....¢

                        ~~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

शुभ संध्या मित्रों आनें वाला "पल"और "कल" मंगलमय हो.

मौसम बेदर्दी हो गया........!!

हे इन्द्र देव रहम कीजिए.....

मौसम बे दर्दी हो गया बेमौसम बरसात  ने की
फसले  चौपट किसानों का तो बेड़गर्ग हो गया

अब  अपना  भी हाल-ऐ- दिल कुछ ऐसा की      
ऑखे  हुई अधिर  , मन "मयुर लंगड़ा" हो गया 

टल रही  है 'नई '  मुलाकात लगातार" उनसे " 
सारे सपनें भिगों गया अब बदन में  सिर्फ है

सिरहन  ठण्ड की  "उनके" बिना  मै  भी 
किसान की  तरह  अब  "झण्ड"  हो गया...!!

                           ~~~~~> मनीष गौतम "मनु"

सुप्रभात मित्रों आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो ......

सोमवार, 13 अप्रैल 2015

_/\_/\_ ईश्वर प्रेम _/\_/\_

सच कहे ईश्वर प्रेम का भूखा है  |  हमारे आडम्बर मात्र दिखावा हैं  |  मैं समझता हूँ हमारे पड़ोसी, हमारे परीचित और हमारा परिवार भूखा न  रहे  किसी परेशानी में न रहें  |

इनसे सामाजिक प्रेम और आत्मिय लगाव   ही ईश्वरीय पूजा है |
जय जय श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री राम .....

_/\_/\_सुप्रभात  मित्रों _/\_/\_

आने वाला  " पल" और "कल" मंगलमय  हो .....|

मेरे सपनें

अक्सर तुम .... 
ये श्रृँगार लिए मेरे सपनों में  रोज "ज्वार -भाटे" की तरह आया करती हो, जैसे ही मैं आँखें खोलूं तुम मेरे अतीत में चली जाया करती हो ......

बस   फिर  रहतीं  हैं  मेरे  पास तुम्हारी मुस्कुराहटों की ओ......खनखनाहटें भरी यादों की यादें इसके बाद न कोई तुम्हारी आने की आहटें.... न.  तुमसे    मिलने      वाली चाहतें.......

इन्ही भावनाओ के लिए मैं तरस जाता हूँ पर क्या करुँ मै तुम्हें  रोज सपनो में ही "ज्वार -भाटे" की  तरह...... केवल   मुस्कुराते  हुए ही देख पाता हूँ | और अच्युत,पारिजात से बंधा तुम्हारे सपनो में मैं फिर खो जाता हूँ......  

शुभसंध्या मित्रों आने वाला  पल और कल मंगलमय हो
                               ~~~~~>मनीष गौतम "मनु"

सुप्रभात

रात देखा जो सपने उन्हें साकार करना है.! सुबह की  रौशनी मैं उन्हे आकार देना है ! लक्ष को   पाना  है आत्मविश्वास से  ! इन्ही आशाओं के साथ..........

आप सभी मित्रों को राम राम भी  तो कहना है.....

सुप्रभात मित्रों आने वाला पल और कल मंगलमय हो...

रविवार, 12 अप्रैल 2015

आवश्यक सूचना खूद S M S करें लिंक से जुड़ें..

आधार नम्बर को   वोटर  आई. डी. से  लिंक करने की प्रक्रिया आप भी कर सकते है आईये जाने.......

मित्रों आप अपने मोबाईल में इस तरह  लिखे..
ECILINK टाइप करें केपिटल में  एक स्पेस दें ओटर कार्ड नम्बर डालें  (नोट :-ओटर कार्ड  में अंग्रेजी के अक्षर और अंक साथ में होते हैं जैसे:-HSB019903 डालें )  एक स्पेस दें  आधार नम्बर डाले (नोट:- केवल 12अंक)  और 51969 पर भेज  दें |
लिंक जुड़ जाने पर तुरंत सक्सेसफुल  लिखा मेसेज आता है तो समझे प्रक्रिया पूरी | कहीं जाने की जरुरत नहीं | यदि मेसेज  नहीं आता  | तो अपने निकट के मतदान केन्द्र  में बी. एल. ओ. से सम्पर्क करें या अपनें तहसिल या जिला निर्वाचन कार्यालय  में ओटर कार्ड, आधार कार्ड  और मो. नम्बर ले के जायें !
एक उदाहरण :-
ECILINK HSB019903 453278094149

(नोट:-कृपया लिखे नम्बरों का इस्तेमाल न करें अपना ओटर कार्ड नम्बर और आधार नम्बर ही टाइप करे और भेजें.)
शुभकामनाओं सहित शुभ संध्या मित्रों....

आनें वाला  "पल" और "कल" मंगलमय हो....

गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

ऩई सुबह नई खबर .......

मतदाता सूची से लिंक होगा आधार कार्ड का नंबर..!

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर फोटो मतदाता सूची के शुद्धीकरण और सत्यापन के लिए नेशनल इलेक्टोरल प्यूरीफिकेशन और अथेंटिकेशन प्रोग्राम शुरू किया गया है। यह प्रोग्राम 3 मार्च से शुरू हो चुका है। इसके तहत मतदाता सूची से आधार कार्ड के नंबर लिंक किए जा रहे हैं।

मतदाता सूची को पूरी तरह से त्रुटि रहित और डुप्लीकेट प्रविष्टि रहित बनाया जाना है ताकि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो सकें। इसके लिए ईपिक नंबर को आधार नंबर से लिंक कराने की सुविधा भी भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दी गई है। इसके लिए मतदाता अपने क्षेत्र के बूथ लेबल अधिकारी से संपर्क कर उसे अपना नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर और ई-मेल एड्रेस के साथ उपलब्ध करा सकता है।

साथ ही मतदाता अपनी वेबसाइट के माध्यम से भी अपने आधार कार्ड नंबर को मतदाता सूची से लिंक करा सकते हैं। मतदाता स्वंय भी आधार कार्ड नंबर और मोबाइल नंबर की जानकारी अपने मतदाता परिचय पत्र से लिंक कर सकता है।

निर्धारित फार्मेट में भरकर देना होगी जानकारी

तहसील से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य कॉल सेंटर 1950 पर कॉल कर या 51969 पर एसएमएस कर मतदाता अपने आधार नंबर और मोबाइल नंबर की जानकारी अपने मतदाता परिचय पत्र से लिंक करा सकता है। निर्वाचक इपिक और आधार कार्ड की प्रतिलिपि के साथ निर्धारित फार्मेट में विवरण भर कर देना होगा।

अपने विधानसभा क्षेत्र में स्थापित मतदाता सुविधा केंद्रों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के कार्यालयों और जिला निर्वाचन कार्यालय में मतदाताओं को यह सुविधा दी गई है।

इस हेतु आपके नजदिकी मतदान केन्द्र पर विशेष अभियान शिविर लगाने की तिथियाँ  निम्नलिखित है --12/4/2015 ~ 24/5/2015 ~21/6/2015
इन तिथियों में अथवा ऊपर बताये गये तरिकों से आप अपना ओवर आई डी आधार से लिंक अवश्य करवायें ! जनहित में जारी !
सुप्रभात मित्रों................
आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो.........

बुधवार, 8 अप्रैल 2015

हम है न ~ "हम किसी से कम नहीं" . ..!

देश वासीयों से अपेक्षा की जाती है की वे अपने बच्चों का दाखिला (एडमिशन) सरकारी स्कूलों में ही करवायें  एक दम नि: शुल्क और अन्य फायदों के साथ   !!

सुप्रभात मित्रों ~
आने वाला "पल" और "कल" मंगलमय हो...... ....!

__________________________ !! जय-हिन्द !!

मेरी ....... सुन्दरता.....!!

मन की सुन्दरता असली मायने की होती है ! मन की सुन्दरता में दिखावा नहीं होता  जो भी वास्तविकता होती है झलक ही जाती है !

तन की सुन्दरता  बेहद खुबसुरत लगती  है ! पर तन की सुन्दरता में दिखावा और छल/कपट होता है ! जो समझ  नहीं आता  ! मगर जब  समझ  में आता है ! तब तक देर  हो जाती  है ! फिर चाहत का भूत उतर जाता है ! और  एक दुसरे को चाहने वाले  बाद में  एक दुसरे  को  देखना तक  पसंद नही करते !

फंडा ये की- हमें  मन की सुन्दरता को समझ कर किसी  से लगाव  या चाहत  बड़ाना चाहिए ! भले ही वो गरीब, कमजोर, या बद्दसुरत क्यों न हो !

शुभ संध्या मित्रों~

आने वाला "पल" और "कल"  मंगलमय हो......